सोमनाथ का प्रशाद

श्री श्री द्वारिका धाम की तीसरी पावन यात्रा के अवसर पर जब मैं सोमनाथ मन्दिर में पहुंची तो परम पिता परमात्मा की अनुकम्पा एवं कृपा प्रशाद से हृदय गद् गद् हो गया । मुझे ऐसा अनुभव हो रहा था कि आज अपने अतिशय प्रियजन से मिलने जा रही हूं जिन्हें पिछले कुछ वर्षों से नहीं देखा है । सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा बनाए गए लाज में हम 16 यात्री ठहरे हुए थे । नारियल के वृक्षों के झुरमुट में उनकी सुन्दरता और भी बढ़ गई थी । जनवरी का महीना था परन्तु समुद्र तट होने के कारण मौसम न सर्द था न ही गर्म । सभी स्नान इत्यादि कर तैयार हो लाज से बाहर निकल मुख्य सड़क पर आ गए तो क्या देखा कि छोटे-छोटे लड़के- लड़कियां हाथों में दूध की थैलियां, विल्व पत्र व रंग-बिरंगे
फूलों की टोकरियां लिए  खड़े थे । हमें देखते ही वे सब दौड़कर हमारी ओर आए । मैंने जी भर कर दूध की थैलियां व फूलों की टोकरियां खरीदी । भक्तजन मेरी ओर आश्चर्य से देख रहे थे । मैं आगे बढ़ गयी । भक्तों ने उन बच्चों को पैसे दे दिए और बच्चे ग्राहकों की खोज में दूसरी ओर चले गए । मेरे पांव सहज में ही लम्बे-लम्बे डग भरते हुए आगे बढ़ रहे थे । आज भी मैं उस मानसिक चित्र को देखकर आनन्द मग्न हो जाती हूं । 
शीघ्र ही हम मन्दिर के विशाल प्रांगण में पहुंच गए । मन्दिर के सामने सरदार बल्लभ भाई पटेल की विशाल खड़ी मूर्ति स्थापित है ऐसा लगता है मानो सरदार बल्लभ भाई पटेल अपने इष्टदेव भगवान शिव को अपलक निहार रहें हों । धन्य हैं ऐसे भक्त ।
हमनें मन्दिर के प्रथम व विशाल द्वार को पार किया और भीतर द्वार पर महिला पुलिस भी थी । पता चला कि अब यह मन्दिर सरकार ने ले लिया है । पुलिस ने हमारा सामान रख लिया परन्तु महिलाओं ने अपने पर्स लाकर में नहीं रखे और कुछ भक्त सामान लेकर  वहीं खड़े रहे । मैं  उत्तरा जी, सोमलता जी इत्यादि महिलाओं को साथ लेकर भीतर गई । मैं आगे बढ़ी और दूध, विल्व पत्र और फूल पुजारी जी को दिए । सबने ऐसा ही किया । हमारे आश्चर्य का ठिकाना तब नहीं रहा जब पुजारी जी ने हमारी पूजा सामग्री को शिवलिंग पर न चढ़ाकर एक ओर रख लिया ।
मैं बहुत दुःखी हुई और मैं प्रथम यात्रा जनवरी 1990 की मधुर स्मृति में खो गई कि कैसे हम सब मन्दिर के आस-पास रेत के ढेरों को पार करते हुए मन्दिर के भीतर आए और सबने बारी-बारी अपने हाथों से श्री सोमनाथ जी की पूजा की थी । और अब देखो हमारे और भगवान के बीच में एक दीवार है- उस पर पुजारी जी भी रूकावट के रूप में खड़े हैं । क्या करें आज  भारत स्वतन्त्र तो परन्तु पूजा परतन्त्र ।
तत्पश्चात मैं उत्तरा जी को साथ लेकर परिक्रमा करने लगे । हम वहां पहुंचे जहां भगवान शिव की अर्द्ध परिक्रमा होती है । अब हमें पीछे की ओर मुड़ना था कि आवाज आई - गड़-गड़-गड़ । हम दोनों दीवार से कान लगाकर सुनने लगी तो आवाज ओर तेज हो गई । "ओ हो ! यह तो दूध की गंगा बह रही है यह तो शिव गंगा है ।" मैंने उत्तरा को कहा,'' आप हाथ डुबाकर निर्माल्य ले लो और मुझे भी दे दो ।'' निर्माल्य के लघु कुण्ड में उत्तरा जी ने हाथ डाला तो देखा कि कुण्ड दूध से भरा था । उत्तरा जी ने चरणामृत लेकर मुझे दिया और स्वयं भी पिया । हम वापिस गर्भ-गृह के सामने हाल में बैठ गई । कुछ भक्त दर्शन कर बाहर चले गए और शेष भक्तों को दर्शन हेतू गर्भ-गृह में भेज दिया । भक्तों ने पूजा शुरू की । विमला भी उनके साथ थी । वह मेरे पास आकर कहने लगी,'' माता जी ! आप भी पूजा कर लो ।'' मैंने कहा,'' मैंने कर ली है ।'' विमला ने हंसते हुए कहा,'' भगवान शिव की राम-नाम चद्दर,मां उमा की चुनरी और थाली-गिलास जो आपने कुल्लू से ही लाया है वह मेरे पास है ।''    मैंने कहा, '' अच्छा चलो ।'' हम गर्भ-गृह की ओर गए । हमारे हाथों में सामान देखकर पुलिस कर्मचारी ने कहा,'' इसे जमा कर दो ।'' मैंने कहा,'' हमें भगवान शिव को भेंट चढ़ानी है । '' कर्मचारी ने कहा ,'' अच्छा ! तो रसीद ले लो ।'' हमनें वैसा ही किया । मैंने गर्भ-गृह में खड़े पुजारी जी से कहा, "पुजारी जी ! इसे भगवान शिव पर चढ़ा दीजिए ।'' पुजारी जी ने मेरे भावों को जानते हुए राम-नाम की चद्दर भगवान शिव के शिवलिंग पर प्रेमपूर्वक चढ़ा दी व चुनरी को मां अन्नपूर्णा के विग्रह पर चढ़ाने के लिए गए तो मैं ध्यानस्थ हो गई और मानसिक रूप से कैलाश पर्वत पर पहुंच गई । इतने में साथ खड़ी उत्तरा जी बोल पड़ी- मम्मी जी ! मम्मी जी !! यह आपने क्या कर दिया पूरी जलैहरी ही हिला दी ।'' मैंने भी देखा सचमुच ही भगवान सोमनाथ जी के ऊपर तांबे की जलैहरी एक ओर से दूसरी ओर झूल रही थी । शीघ्र ही जलैहरी का हिलना बन्द हो गया और हम सब कृत्य-कृत्य हो गए ।
 यही है प्रभु की अपरम्पार कृपा । यही है भगवान सोमनाथ जी का प्रशाद ।  
 

 Even water, which has a natural tendency to flow downwards, is drawn up to the sky by the sun's rays. In the same way, God's grace lifts up the mind which has got a tendency to run after sense objects. Sharda Maa

Submit articles- articles@mahadevitirth.com | sharadvani@mahadevitirth.com   Questions - admin@mahadevitirth.com

Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth   Mahadevi Tirth    

outils espionnage pc mobile surveillance kit press application pour espionner les messages espionner iphone 3gs ios 5 comment dГ©tecter un logiciel espion sur son mobile press here press espionner un espionner un iphone 4 a distance espionner avec mobile surveillance software in india cell phone spy software reviews