परम पुज्य स्वामी जी माहाराज के सरकार रुप में भगवान के साक्षात दर्शन

मेरा जनम स्वर्गीय क्ष्री करम चन्द के घर बसी गुलाम हुसैन मुहल्ले में दिनांक १६।९।१९४६ को हुआ था। बैतृक जायदाद कुल्लू में होने की वजह से मेरे पिता जी शुरु से ही कुल्लू मे व्यवसाय करते व रहते थे। अतः मै और मेरे छोटे अनुज व माताजी(सरस्वती देवी) सहित के पास के ही गाँव में रहते थे। वहाँ पर ही पला और बडा हुआ।मै अपनी पडाई पूरी कर के अपने पिता के पास कुल्लू आकर रहने लागा और सरकारी नौकरी १९६४ में करने लगा। और मैं स्वामी जी के साक्षात आशिर्वाद व असीम कृपा से ऊँचे पद पर पहुँच कर अधिकारी वर्ग सरकारी सेवा से २००५ में सेवा निवृत भी हो चुका हूँ। क्ष्री अवतार चन्द भोपला जी अखारा बज‍़ार कुल्लू में जाने माने बिजली के ठेकेदार व व्यवसायी थे। जो कि रिश्ते से मेरे मामा जी भी लगते हैं। वह परम पुज्निय स्वामी जी के अतयन्त करीब थे। वर्ष १९६९-१९७० में जब भी कभी मन्दिर में कोई समान भेजना होता था तो मामा जिक्ष्री भोपला जी अपना साईकल देकर सामान मन्दिर मे देने के लिए मुझे कह देते थे। जब जब मैं परम पूज्य स्वामा जी माहाराज के पास जाने का मौका मिलता रहा। मुझसे बहुत ही प्यार करते व अपने हाथों से चाय बना कर पिलाते। व आशिर्वाद देते। कभी कभी मैं और मेरे भाई क्ष्री विजय भोपाल जी - जो भोपला जी के भतीजे लगते है - हम दोनो महाराज जीके दर्शन के लिऐ सुबह जाते व चाय भी क्ष्री पुज्य स्वामी जी माहाराज अपने शुभ हाथों से चाय पिलाते, इसी दौरान हमने उनको कई बार त्रीमूर्ति के पास व्यवसथा करते देखा। कुछ कारण वश वर्ष १९७०-७१ में स्वामी जी ने क्ष्री शामलाल कौशल जी के घर में रहने का निश्चय किया। इनका घर मेरे व परम पुज्नीय गीता माता जी के घर के बहुत नज़दीक ही था। फिर उस घर मे अलग कमरे मे सतसंग आरम्भ किया। अध्यातमिक कार्य जैसे कि रामायण पाठ करने का भी अवसर मिला करता था। ईसी बीच परम पुज्य सवामी जी मेरे घर के सामने नज़दीक रास्ते से परम आदरनीय गीता माँ जी के पैतृक घर के जाया करते थे। आते जाते समय जब भी स्वामी जी की दृष्टि मेरे घर की और जाती तो आंगन में खडे होने पर उनकी दया दृष्टि पडती। वह सीडियाँ चड़ कर ज़रुर मुझे दर्शन देकर (साथ में सर्दि की वजह से आग सेककर अपने स्थान पर लौट जाते थे।

 Even water, which has a natural tendency to flow downwards, is drawn up to the sky by the sun's rays. In the same way, God's grace lifts up the mind which has got a tendency to run after sense objects. Sharda Maa

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